श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.12.84 
वेदैश्च ब्रह्मचर्यैश्च गुरुभिश्चोपकर्शित:।
भोगकाले महत्कृच्छ्रं पुनरेव प्रपत्स्यते॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
'हाय! अब तक श्री राम वेदों का अध्ययन, ब्रह्मचर्य का पालन और अनेक गुरुजनों की सेवा करने के कारण दुबले-पतले रहे हैं। अब जब उनके सुख भोगने का समय आया है, तो वे वन में जाकर महान दुःख भोगेंगे।' 84.
 
'Alas! So far Shri Ram has been thin due to studying the Vedas, observing celibacy and serving many teachers. Now when the time for him to enjoy pleasures has come, he will go to the forest and suffer great pain. 84.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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