श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  2.12.83 
बालिशो बत कामात्मा राजा दशरथो भृशम्।
स्त्रीकृते य: प्रियं पुत्रं वनं प्रस्थापयिष्यति॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
'लोग मेरी निन्दा करेंगे और कहेंगे कि राजा दशरथ बड़े मूर्ख और कामी हैं, जो अपने प्रिय पुत्र को स्त्री की तृप्ति के लिए वन में भेज रहे हैं।' 83
 
'People will slander me and say that King Dasharatha is a very foolish and lustful person who is sending his beloved son to the forest to satisfy a woman. 83
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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