श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.12.82 
तं तु मां जीवलोकोऽयं नूनमाक्रोष्टुमर्हति।
मया ह्यपितृक: पुत्र: स महात्मा दुरात्मना॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
'हाय! मुझ दुष्टात्मा ने अपने महान पुत्र को जीते जी ही पितृहीन कर दिया है। समस्त जगत् मुझे अवश्य ही कोसेगा और गालियाँ देगा, जो उचित ही होंगी॥ 82॥
 
'Alas! I, the evil soul, have rendered my great son fatherless while I am still alive. The whole world will surely curse me and abuse me, which will be justified.॥ 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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