श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 71-72h
 
 
श्लोक  2.12.71-72h 
विप्रकारं च रामस्य सम्प्रयाणं वनस्य च॥ ७१॥
सुमित्रा प्रेक्ष्य वै भीता कथं मे विश्वसिष्यति।
 
 
अनुवाद
'श्रीरामजी का राज्याभिषेक निरस्त होते और उनका वन गमन होते देखकर सुमित्रा अवश्य ही भयभीत हो जाएगी। फिर वह मुझ पर कैसे विश्वास करेगी?॥ 71 1/2॥
 
'Sumitra will surely be frightened when she sees the cancellation of Shri Rama's coronation and his departure to the forest. Then how will she believe me?॥ 71 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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