श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  2.12.7-8h 
नृशंसे दुष्टचारित्रे कुलस्यास्य विनाशिनि॥ ७॥
किं कृतं तव रामेण पापे पापं मयापि वा।
 
 
अनुवाद
हे निर्दयी और दुष्ट कैकेयी! तू इस कुल का नाश करने वाली डायन है। पापिनी! बता, मैंने या भगवान राम ने तेरा क्या बिगाड़ा है?॥ 7 1/2॥
 
‘You merciless and wicked Kaikeyi! You are a witch who will destroy this family. Sinner! Tell me, what harm have I or Lord Rama done to you?॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)