श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  2.12.64-65h 
किं मां वक्ष्यन्ति राजानो नानादिग्भ्य: समागता:॥ ६४॥
बालो बतायमैक्ष्वाकश्चिरं राज्यमकारयत्।
 
 
अनुवाद
'विभिन्न दिशाओं से आने वाले राजा लोग खेदपूर्वक मेरी ओर देखेंगे और कहेंगे कि इक्ष्वाकुवंश का यह मूर्ख राजा इतने समय तक इस राज्य पर कैसे शासन करता रहा?॥64 1/2॥
 
'The kings coming from various directions will look at me with regret and say how has this foolish king of the Ikshvaku dynasty ruled this kingdom for so long?॥ 64 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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