श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.12.47 
अहं हि विषमद्यैव पीत्वा बहु तवाग्रत:।
पश्यतस्ते मरिष्यामि रामो यद्यभिषिच्यते॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
'यदि राम का राज्याभिषेक हो गया तो मैं आज ही तुम्हारे सामने, तुम्हारे सामने ही बहुत सारा विष पीकर मर जाऊँगा ॥47॥
 
'If Rama's coronation takes place, I will drink a lot of poison and die right in front of you today itself, in front of you. ॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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