श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.12.45 
स त्वं धर्मं परित्यज्य रामं राज्येऽभिषिच्य च।
सह कौसल्यया नित्यं रन्तुमिच्छसि दुर्मते॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
(परन्तु तुम मेरी बात क्यों सुनोगे?) हे मूर्ख राजा! तुम धर्म को त्यागकर तथा भगवान राम को राजा बनाकर रानी कौशल्या के साथ रमण करना चाहते हो।
 
(But why will you listen to me?) O foolish king! You want to have fun with Queen Kausalya by abandoning Dharma and anointing Lord Rama as the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)