श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.12.42 
किल्बिषं त्वं नरेन्द्राणां करिष्यसि नराधिप।
यो दत्त्वा वरमद्यैव पुनरन्यानि भाषसे॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
"महाराज! यदि आप आज यह वरदान देकर उसके विपरीत कुछ कहेंगे, तो आप अपने कुल के राजाओं के माथे पर कलंक लगा देंगे। 42.
 
"Maharaj! If you grant this boon today and then say something contrary to it, you will bring disgrace on the foreheads of the kings of your clan. 42.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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