श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.12.39 
यदि दत्त्वा वरौ राजन् पुन: प्रत्यनुतप्यसे।
धार्मिकत्वं कथं वीर पृथिव्यां कथयिष्यसि॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! यदि आप दो वरदान देने के बाद भी पश्चाताप करते हैं, तो इस संसार में अपनी धार्मिकता का यश कैसे फैला सकेंगे?
 
'O King! If after giving two boons you repent for them then how will you be able to spread the rumour of your righteousness in this world, O brave king?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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