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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना
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श्लोक 36
श्लोक
2.12.36
अञ्जलिं कुर्मि कैकेयि पादौ चापि स्पृशामि ते।
शरणं भव रामस्य माधर्मो मामिह स्पृशेत्॥ ३६॥
अनुवाद
'केकयनन्दिनी! मैं हाथ जोड़कर आपके चरणों में गिरता हूँ। कृपया श्री राम को शरण दीजिए, जिससे मैं यहाँ कोई पाप न करूँ।'॥ 36॥
‘Kekayanandini! I fold my hands and fall at your feet. Please give shelter to Shri Ram so that I do not commit any sin here.’॥ 36॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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