| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना » श्लोक 33 |
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| | | | श्लोक 2.12.33  | क्षमा यस्मिंस्तपस्त्याग: सत्यं धर्म: कृतज्ञता।
अप्यहिंसा च भूतानां तमृते का गतिर्मम॥ ३३॥ | | | | | | अनुवाद | | 'क्षमा, तप, त्याग, सत्य, धर्म, कृतज्ञता और समस्त जीवों पर दया करने वाले श्री रामजी के बिना मेरा क्या होगा?॥ 33॥ | | | | 'What will happen to me without Shri Ram who is full of forgiveness, penance, sacrifice, truth, religion, gratitude and compassion towards all living beings?॥ 33॥ | | ✨ ai-generated | | |
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