श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.12.27 
बहूनां स्त्रीसहस्राणां बहूनां चोपजीविनाम्।
परिवादोऽपवादो वा राघवे नोपपद्यते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'मेरी हजारों पत्नियाँ हैं और बहुत से निर्वाह सेवक हैं, परन्तु मैं किसी को भी भगवान् राम के विषय में सच्ची या झूठी कोई शिकायत करते नहीं सुनता॥ 27॥
 
'I have thousands of wives and numerous subsistence servants, but I do not hear anyone making any complaint, true or false, about Lord Rama.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)