श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.12.26 
शुश्रूषां गौरवं चैव प्रमाणं वचनक्रियाम्।
कस्तु भूयस्तरं कुर्यादन्यत्र पुरुषर्षभात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'अपने बड़ों की सेवा करने, उन्हें आदर देने, उनकी बात मानने और उनकी आज्ञा का तुरन्त पालन करने में पुरुषोत्तम श्री राम से बढ़कर कौन है?॥ 26॥
 
'Who is greater than that best of men, Shri Ram, in serving his elders, giving them honour, acknowledging their words and promptly obeying their orders?॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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