vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना
»
श्लोक 23
श्लोक
2.12.23
अत्यन्तसुकुमारस्य तस्य धर्मे कृतात्मन:।
कथं रोचयसे वासमरण्ये भृशदारुणे॥ २३॥
अनुवाद
'ऐसे कोमल और दृढ़ धर्मनिष्ठ राम को वनवास देना तुम्हें कैसे अच्छा लग रहा है? अरे! तुम्हारा हृदय तो बड़ा कठोर है।॥ 23॥
'How can you find it pleasing to send Rama, who is so delicate and firmly devoted to Dharma, into exile? Oh! You have a very hard heart.॥ 23॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd