श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.12.22 
तस्य धर्मात्मनो देवि वने वासं यशस्विन:।
कथं रोचयसे भीरु नव वर्षाणि पञ्च च॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे डरपोक देवी! उन्हीं पुण्यवान और यशस्वी श्री रामजी का चौदह वर्ष का वनवास तुम्हें कैसा लगा?॥ 22॥
 
'O timid goddess! How do you like the fourteen year exile of the same virtuous and famous Shri Ram?॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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