श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.12.19 
इक्ष्वाकूणां कुले देवि सम्प्राप्त: सुमहानयम्।
अनयो नयसम्पन्ने यत्र ते विकृता मति:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'देवि! न्यायप्रिय इक्ष्वाकुवंश पर बड़ा अन्याय हुआ है, जहाँ तुम्हारी बुद्धि इस प्रकार विकृत हो गई है।॥19॥
 
'Devi! A great injustice has befallen the just Ikshvaku dynasty, where your intellect has become distorted in this manner.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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