श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.12.16 
अथ जिज्ञाससे मां त्वं भरतस्य प्रियाप्रिये।
अस्तु यत्तत्त्वया पूर्वं व्याहृतं राघवं प्रति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'यदि आप यह जानना चाहते हैं कि भरत मुझे प्रिय हैं या नहीं, तो आपने रघुनन्दन भरत के विषय में जो कुछ कहा है, वह पूर्ण हो, अर्थात् आपके प्रथम वरदान के अनुसार मैं भरत का राज्याभिषेक स्वीकार करता हूँ।॥ 16॥
 
'If you wish to know whether Bharata is dear to me or not, then whatever you have said about Raghunandan Bharata should be fulfilled, that is, as per your first boon, I accept Bharata's coronation.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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