श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  2.12.13-14h 
तिष्ठेल्लोको विना सूर्यं सस्यं वा सलिलं विना॥ १३॥
न तु रामं विना देहे तिष्ठेत्तु मम जीवितम्।
 
 
अनुवाद
‘यह तो संभव है कि सूर्य के बिना यह संसार जीवित रह सकता है अथवा जल के बिना फसलें उग सकती हैं, परंतु भगवान राम के बिना मेरा शरीर जीवित नहीं रह सकता।॥13 1/2॥
 
‘It is possible that this world can survive without the sun or crops can grow without water, but without Lord Rama my body cannot survive.॥ 13 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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