श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.12.102 
परित्यजेयु: पितरोऽपि पुत्रान्
भार्या: पतींश्चापि कृतानुरागा:।
कृत्स्नं हि सर्वं कुपितं जगत् स्याद्
दृष्ट्वैव रामं व्यसने निमग्नम्॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
‘श्री राम को संकटों के समुद्र में डूबते देखकर पिता अपने पुत्रों को त्याग देंगे। यहाँ तक कि प्रेम करने वाली पत्नियाँ भी अपने पतियों को त्याग देंगी। इस प्रकार सारा जगत् क्रोधित होकर शत्रुवत आचरण करेगा॥102॥
 
‘Fathers will abandon their sons when they see Shri Ram drowning in the sea of ​​troubles. Even loving wives will abandon their husbands. In this way the whole world will become enraged and behave in a hostile manner.॥ 102॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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