श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  2.12.10-11h 
जीवलोको यदा सर्वो रामस्याह गुणस्तवम्॥ १०॥
अपराधं कमुद्दिश्य त्यक्ष्यामीष्टमहं सुतम्।
 
 
अनुवाद
'जब समस्त चराचर जगत श्री रामजी के गुणों का गुणगान करता है, तब मैं किस अपराध के कारण अपने प्रिय पुत्र का परित्याग करूँ?॥10 1/2॥
 
'When the entire living world praises the virtues of Shri Ram, then for what crime should I abandon my beloved son?॥10 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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