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ramayan 2.119.9: सीता! अब रात हो गई है, तारों से सजी है। चाँदनी की चादर ओढ़े चन्द्रदेव आकाश में उदित होते दिखाई दे रहे हैं।   |   ramayan सर्ग 2.119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.119.9 
सम्प्रवृत्ता निशा सीते नक्षत्रसमलंकृता।
ज्योत्स्नाप्रावरणश्चन्द्रो दृश्यतेऽभ्युदितोऽम्बरे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सीता! अब रात हो गई है, तारों से सजी है। चाँदनी की चादर ओढ़े चन्द्रदेव आकाश में उदित होते दिखाई दे रहे हैं।
 
Sita! It is night now, it is decorated with stars. The moon god is seen rising in the sky wearing a blanket of moonlight.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)