vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना
»
श्लोक 15
श्लोक
2.119.15
प्रहृष्टस्त्वभवद् रामो लक्ष्मणश्च महारथ:।
मैथिल्या: सत्क्रियां दृष्ट्वा मानुषेषु सुदुर्लभाम्॥ १५॥
अनुवाद
भगवान् श्री राम और महारथी लक्ष्मण सीता का आतिथ्य देखकर बहुत प्रसन्न हुए, जो मनुष्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ है। 15॥
Lord Shri Ram and Maharathi Lakshman were very happy to see Sita's hospitality, which is very rare for humans. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×