श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.119.13 
तथा तु भूषितां सीतां ददर्श वदतां वर:।
राघव: प्रीतिदानेन तपस्विन्या जहर्ष च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब श्री राम ने इस प्रकार वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित सीता को देखा, तब तपस्विनी अनसूया के उस प्रेमरूपी उपहार को देखकर भाषियों में श्रेष्ठ श्री रघुनाथजी अत्यन्त प्रसन्न हुए॥13॥
 
When Shri Ram saw Sita adorned with clothes and jewelery in this way, then Shri Raghunathji, the best among the speakers, became very happy with the sight of that gift of love from the ascetic Anasuya. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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