श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 119: अनसूया की आज्ञा से सीता का उनके दिये हुए वस्त्राभूषणों को धारण करके श्रीरामजी के पास आना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.119.1 
अनसूया तु धर्मज्ञा श्रुत्वा तां महतीं कथाम्।
पर्यष्वजत बाहुभ्यां शिरस्याघ्राय मैथिलीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
उस लम्बी कथा को सुनकर धर्म की ज्ञाता अनसूया ने मिथिला पुत्री सीता को दोनों भुजाओं से गले लगाया और उनका माथा सूंघकर कहा -
 
After listening to that long tale, Anasuya, the knower of Dharma, embraced the daughter of Mithila, Sita, with both her arms and smelling her forehead said -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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