श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.118.52 
तत: श्वशुरमामन्त्र्य वृद्धं दशरथं नृपम्।
मम पित्रा त्वहं दत्तां रामाय विदितात्मने॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मेरे पिता ने मेरे वृद्ध ससुर राजा दशरथ की अनुमति से मुझे आत्मज्ञानी श्री राम को दान कर दिया। 52.
 
‘Thereafter, with the permission of my old father-in-law, King Dasharatha, my father donated me to the self-enlightened Sri Ram. 52.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas