श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.118.49 
तेनापूरयता वेगान्मध्ये भग्नं द्विधा धनु:।
तस्य शब्दोऽभवद् भीम: पतितस्याशनेर्यथा॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जब वह उसे बड़े जोर से खींच रहा था, तब धनुष बीच में से टूटकर दो टुकड़ों में बँट गया। उसके टूटते ही भयंकर शब्द हुआ, मानो वहाँ वज्र गिर पड़ा हो॥49॥
 
‘While he was pulling it with great force, the bow broke in the middle and broke into two pieces. When it broke, there was a terrible sound as if a thunderbolt had struck there.॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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