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श्लोक 2.118.48  |
निमेषान्तरमात्रेण तदानम्य महाबल:।
ज्यां समारोप्य झटिति पूरयामास वीर्यवान्॥ ४८॥ |
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| अनुवाद |
| महाबली और पराक्रमी श्री रामजी ने पलक झपकते ही धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे तुरन्त अपने कानों तक खींच लिया॥ 48॥ |
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| 'The mighty and most valiant Sri Rama strung the bow in the blink of an eye and instantly drew it till his ears.॥ 48॥ |
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