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श्लोक 2.118.47  |
इत्युक्तस्तेन विप्रेण तद् धनु: समुपानयत्।
तद् धनुर्दर्शयामास राजपुत्राय दैविकम्॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| ‘महान् ब्राह्मण विश्वामित्र के ऐसा कहने पर मेरे पिता ने वह दिव्य धनुष मंगवाया और राजकुमार श्रीराम को दिखाया। |
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| ‘Upon the great Brahmin Visvamitra saying this, my father called for that divine bow and showed it to Prince Shri Ram. |
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