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श्लोक 2.118.42  |
इदं च धनुरुद्यम्य सज्यं य: कुरुते नर:।
तस्य मे दुहिता भार्या भविष्यति न संशय:॥ ४२॥ |
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| अनुवाद |
| 'जो मनुष्य इस धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, मेरी पुत्री सीता उसकी पत्नी होगी; इसमें कोई संदेह नहीं है।' |
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| 'The man who will lift this bow and string it, my daughter Sita will be his wife; there is no doubt about this.' |
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