श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.118.41 
तद्धनु: प्राप्य मे पित्रा व्याहृतं सत्यवादिना।
समवाये नरेन्द्राणां पूर्वमामन्त्र्य पार्थिवान्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘उस धनुषको प्राप्त करके मेरे सत्यवादी पिताने सर्वप्रथम संसारके राजाओंको आमंत्रित किया और उन राजाओंके समूहसे यह कहा-॥41॥
 
‘After obtaining that bow, my truthful father first invited the kings of the world and said this to the group of those kings -॥ 41॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas