श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.118.31 
अन्तरिक्षे च वागुक्ता प्रतिमामानुषी किल।
एवमेतन्नरपते धर्मेण तनया तव॥३१॥
 
 
अनुवाद
'उसी समय आकाशवाणी हुई, जो मानव-भाषा में थी (अर्थात् मेरे बारे में जो वाणी आई वह अमानवीय-दिव्य थी) और बोली- 'प्रभु! आप जो कह रहे हैं वह ठीक है, यह कन्या धर्म से आपकी पुत्री है।'
 
‘At this very time a voice came from the sky, which was spoken in a human language (or the voice that came about me was inhuman-divine). It said- ‘Lord! What you are saying is correct, this girl is your daughter by religion.’
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas