श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.118.27 
मिथिलाधिपतिर्वीरो जनको नाम धर्मवित्।
क्षत्रकर्मण्यभिरतो न्यायत: शास्ति मेदिनीम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मिथिला जनपद के वीर राजा 'जनक' नाम से विख्यात हैं। वे धर्म के ज्ञाता हैं, अतः क्षत्रियवत कर्म में तत्पर होकर न्यायपूर्वक पृथ्वी पर शासन करते हैं॥ 27॥
 
‘The brave king of Mithila district is famous by the name of ‘Janaka’. He is a knower of Dharma and hence, being devoted to Kshatriya-like duties, he rules the earth with justice.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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