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श्लोक 2.118.25  |
तां कथां श्रोतुमिच्छामि विस्तरेण च मैथिलि।
यथाभूतं च कात्स्न्र्येन तन्मे त्वं वक्तुमर्हसि॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| ‘मिथिलेशानंदिनी! मैं वह कथा विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। अतः वह कैसे घटित हुई, यह सब विस्तारपूर्वक मुझसे कहो।’॥25॥ |
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| ‘Mithileshanandini! I want to hear that story in detail. So tell me everything in detail, how it happened.’॥ 25॥ |
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