श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 118: सीता-अनसूया-संवाद, अनसूया का सीता को प्रेमोपहार देना तथा अनसूया के पूछने पर सीता का उन्हें अपने स्वयंवर की कथा सुनाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.118.24 
स्वयंवरे किल प्राप्ता त्वमनेन यशस्विना।
राघवेणेति मे सीते कथा श्रुतिमुपागता॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'सीते, मैंने सुना है कि महाप्रतापी राघवेन्द्र ने तुम्हें स्वयंवर में प्राप्त किया है।
 
'Sita, I have heard that the illustrious Raghavendra obtained you in a swayamvara.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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