Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.117.4: 'अतः हमें भी अन्यत्र जाना चाहिए' ऐसा विचार करके श्री रघुनाथजी सीता और लक्ष्मण के साथ वहाँ से चले गए।   |   ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.117.4 
तस्मादन्यत्र गच्छाम इति संचिन्त्य राघव:।
प्रातिष्ठत स वैदेह्या लक्ष्मणेन च संगत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'अतः हमें भी अन्यत्र जाना चाहिए' ऐसा विचार करके श्री रघुनाथजी सीता और लक्ष्मण के साथ वहाँ से चले गए।
 
Thinking that 'Therefore, we should also go elsewhere', Sri Raghunatha left from there along with Sita and Lakshman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)