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ramayan 2.117.3: 'जबसे महात्मा भरत की सेना ने यहाँ पड़ाव डाला है, तबसे हाथी-घोड़ों के मल से यह भूमि और भी अधिक अशुद्ध हो गई है।॥3॥   |   ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.117.3 
स्कन्धावारनिवेशेन तेन तस्य महात्मन:।
हयहस्तिकरीषैश्च उपमर्द: कृतो भृशम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'जबसे महात्मा भरत की सेना ने यहाँ पड़ाव डाला है, तबसे हाथी-घोड़ों के मल से यह भूमि और भी अधिक अशुद्ध हो गई है।॥3॥
 
'Since the army of Mahatma Bharat has camped here, the land has been made more impure by the dung of elephants and horses.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)