श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.117.28 
त्वद्विधास्तु गुणैर्युक्ता दृष्टलोकपरावरा:।
स्त्रिय: स्वर्गे चरिष्यन्ति यथा पुण्यकृतस्तथा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
परंतु तुम्हारे समान जो पुण्यात्मा स्त्रियाँ इस लोक और परलोक को जानने वाली हैं, उत्तम गुणों से युक्त हैं और पुण्य कर्मों में तत्पर रहती हैं, वे अन्य पुण्यात्माओं के समान स्वर्ग में विचरण करेंगी॥ 28॥
 
‘But the virtuous women like you who know about this world and the other world, are endowed with excellent qualities and remain engaged in pious deeds; hence they will roam in the heaven like the other pious souls.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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