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ramayan 2.117.26: जो स्त्रियाँ अपने पतियों पर शासन करती हैं, जिनका मन काम के वशीभूत है, वे इस प्रकार अपने पतियों का अनुसरण नहीं करतीं। वे गुण-दोष को नहीं जानतीं, इसलिए अपनी इच्छानुसार इधर-उधर भटकती रहती हैं॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.117.26 
न त्वेवमनुगच्छन्ति गुणदोषमसत्स्त्रिय:।
कामवक्तव्यहृदया भर्तृनाथाश्चरन्ति या:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो स्त्रियाँ अपने पतियों पर शासन करती हैं, जिनका मन काम के वशीभूत है, वे इस प्रकार अपने पतियों का अनुसरण नहीं करतीं। वे गुण-दोष को नहीं जानतीं, इसलिए अपनी इच्छानुसार इधर-उधर भटकती रहती हैं॥ 26॥
 
Those women who rule over their husbands, whose minds are under the influence of lust, do not follow their husbands in this way. They do not know the merits and demerits; hence they wander here and there according to their will.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)