श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.117.24 
दु:शील: कामवृत्तो वा धनैर्वा परिवर्जित:।
स्त्रीणामार्यस्वभावानां परमं दैवतं पति:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘पति चाहे दुष्ट स्वभाव का हो, मनमाना आचरण करने वाला हो अथवा दरिद्र हो, परन्तु उत्तम स्वभाव वाली स्त्री के लिए वह महान देवता के समान है ॥24॥
 
‘The husband may be of bad nature, behave arbitrarily or be poor, but for a woman with good nature he is like a great god.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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