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ramayan 2.117.22: 'हे सीता! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तूने अपने बंधु-बांधवों और उनसे प्राप्त मान-प्रतिष्ठा को त्याग दिया है और जिन भगवान राम ने तुझे वन में भेजा है, उन्हीं का अनुसरण कर रही है॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.117.22 
त्यक्त्वा ज्ञातिजनं सीते मानवृद्धिं च मानिनि।
अवरुद्धं वने रामं दिष्टॺा त्वमनुगच्छसि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'हे सीता! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तूने अपने बंधु-बांधवों और उनसे प्राप्त मान-प्रतिष्ठा को त्याग दिया है और जिन भगवान राम ने तुझे वन में भेजा है, उन्हीं का अनुसरण कर रही है॥ 22॥
 
'Proud Sita! It is a matter of great fortune that you have left your relatives and friends and have given up the honour and prestige you received from them and are following Lord Rama who has sent you to the forest.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)