श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.117.21 
तत: सीतां महाभागां दृष्ट्वा तां धर्मचारिणीम्।
सान्त्वयन्त्यब्रवीद् वृद्धा दिष्टॺा धर्ममवेक्षसे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
धर्म के मार्ग पर चलने वाली महाभाग्यशाली सीता को देखकर वृद्धा देवी अनसूया ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा - 'सीते! यह सौभाग्य की बात है कि तुम केवल धर्म पर ही ध्यान देती हो।
 
Seeing the great fortunate Sita who followed the path of Dharma, the old goddess Anasuya consoled her and said - 'Sita! It is fortunate that you focus only on Dharma.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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