श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.117.19 
तां तु सीता महाभागामनसूयां पतिव्रताम्।
अभ्यवादयदव्यग्रा स्वं नाम समुदाहरत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सीता ने पास जाकर शान्त भाव से अपना नाम बताया और उन परम भक्तवधू अनसूया को प्रणाम किया॥19॥
 
Sita went near and calmly told her name and bowed to that great devotee and devotee Anasuya. 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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