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श्लोक 2.117.16  |
अनसूयेति या लोके कर्मभि: ख्यातिमागता।
तां शीघ्रमभिगच्छ त्वमभिगम्यां तपस्विनीम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| जो तपस्विनी देवी अपने पुण्यकर्मों के कारण संसार में अनसूया नाम से विख्यात हुई हैं, वे तुम्हारी शरण के योग्य हैं; तुम शीघ्र ही उनके पास जाओ।॥16॥ |
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| 'The ascetic goddess who has become famous in the world by the name of Anasuya due to her good deeds is worthy of your shelter; you should go to her quickly.'॥ 16॥ |
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