श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.117.16 
अनसूयेति या लोके कर्मभि: ख्यातिमागता।
तां शीघ्रमभिगच्छ त्वमभिगम्यां तपस्विनीम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो तपस्विनी देवी अपने पुण्यकर्मों के कारण संसार में अनसूया नाम से विख्यात हुई हैं, वे तुम्हारी शरण के योग्य हैं; तुम शीघ्र ही उनके पास जाओ।॥16॥
 
'The ascetic goddess who has become famous in the world by the name of Anasuya due to her good deeds is worthy of your shelter; you should go to her quickly.'॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd