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ramayan 2.117.15: 'राजकुमारी! तुमने महर्षि अत्रिका के वचन सुन ही लिए हैं; अब अपने कल्याण के लिए तुम्हें शीघ्र ही इन तपस्विनी देवी के पास जाना चाहिए॥ 15॥   |   ramayan सर्ग 2.117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 117: श्रीराम आदि का अत्रिमुनि के आश्रम पर जाकर उनके द्वारा सत्कृत होना तथा अनसूया द्वारा सीता का सत्कार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.117.15 
राजपुत्रि श्रुतं त्वेतन्मुनेरस्य समीरितम्।
श्रेयोऽर्थमात्मन: शीघ्रमभिगच्छ तपस्विनीम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'राजकुमारी! तुमने महर्षि अत्रिका के वचन सुन ही लिए हैं; अब अपने कल्याण के लिए तुम्हें शीघ्र ही इन तपस्विनी देवी के पास जाना चाहिए॥ 15॥
 
'Princess! You have already heard the words of Maharishi Atrika; now for your own welfare you should quickly go to this ascetic goddess.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)