श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 116: वृद्ध कुलपति सहित बहुत-से ऋषियों का चित्रकूट छोड़कर दूसरे आश्रम में जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.116.8 
अथर्षिर्जरया वृद्धस्तपसा च जरां गत:।
वेपमान इवोवाच रामं भूतदयापरम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के ऐसा पूछने पर एक महामुनि, जो पहले से ही वृद्धावस्था के कारण वृद्ध थे और तपस्या के कारण भी वृद्ध हो गए थे, समस्त प्राणियों पर दया करने वाले श्री रामजी से काँपते हुए बोले-॥8॥
 
On being asked this by Shri Rama, a great sage, who was already old due to old age and had also become old through austerities, spoke tremblingly to Shri Rama who had compassion on all creatures -॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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