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ramayan 2.116.3: वे तपस्वी मुनि भगवान राम की ओर आँखें सिकोड़े और भौंहें उठाए हुए आपस में धीरे-धीरे बातें कर रहे थे और हृदय में शंकालु होकर आपस में कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे॥3॥   |   ramayan सर्ग 2.116: वृद्ध कुलपति सहित बहुत-से ऋषियों का चित्रकूट छोड़कर दूसरे आश्रम में जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 116: वृद्ध कुलपति सहित बहुत-से ऋषियों का चित्रकूट छोड़कर दूसरे आश्रम में जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.116.3 
नयनैर्भ्रुकुटीभिश्च रामं निर्दिश्य शङ्किता:।
अन्योन्यमुपजल्पन्त: शनैश्चक्रुर्मिथ: कथा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे तपस्वी मुनि भगवान राम की ओर आँखें सिकोड़े और भौंहें उठाए हुए आपस में धीरे-धीरे बातें कर रहे थे और हृदय में शंकालु होकर आपस में कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे॥3॥
 
Those ascetic sages were conversing softly with each other, with their eyes furrowed and eyebrows pointed towards Lord Rama, and being suspicious in their hearts, they were discussing something amongst themselves. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)