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श्लोक 2.116.24  |
अभिनन्द्य समापृच्छॺ समाधाय च राघवम्।
स जगामाश्रमं त्यक्त्वा कुलै: कुलपति: सह॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् कुलगुरु महर्षि श्री रामचन्द्रजी को नमस्कार करके, उनसे प्रश्न करके तथा उन्हें सान्त्वना देकर वे आश्रम से निकलकर अपने मण्डल के ऋषियों के साथ वहाँ से चले गए॥ 24॥ |
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| Thereafter after greeting the Vice Chancellor Maharshi Shri Ramchandraji, inquiring from him and consoling him, he left the ashram and went away from there with the sages of his group.॥ 24॥ |
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