श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 116: वृद्ध कुलपति सहित बहुत-से ऋषियों का चित्रकूट छोड़कर दूसरे आश्रम में जाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.116.21 
खरस्त्वय्यपि चायुक्तं पुरा राम प्रवर्तते।
सहास्माभिरितो गच्छ यदि बुद्धि: प्रवर्तते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! यदि आपकी ऐसी इच्छा हो तो खर आपके साथ दुर्व्यवहार करे, उससे पहले ही आप हमारे साथ यह स्थान छोड़ दीजिए।॥ 21॥
 
'Shri Ram! If you feel like it, then leave this place with us before Khara misbehaves with you.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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