Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.116.14-15: वे अनार्य राक्षस नाना प्रकार के भयंकर, क्रूर, डरावने, देखने में दुःखदायी रूपों में प्रकट होते हैं। वे तपस्वियों को पापमय और अपवित्र वस्तुओं का स्पर्श कराते हैं तथा अपने सम्मुख खड़े मुनियों को भी कष्ट पहुँचाते हैं।॥14-15॥ | ramayan सर्ग 2.116: वृद्ध कुलपति सहित बहुत-से ऋषियों का चित्रकूट छोड़कर दूसरे आश्रम में जाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दर्शयन्ति हि बीभत्सै: क्रूरैर्भीषणकैरपि।
नानारूपैर्विरूपैश्च रूपैरसुखदर्शनै:॥ १४॥
अप्रशस्तैरशुचिभि: सम्प्रयुज्य च तापसान्।
प्रतिघ्नन्त्यपरान् क्षिप्रमनार्या: पुरत: स्थितान्॥ १५॥
अनुवाद
वे अनार्य राक्षस नाना प्रकार के भयंकर, क्रूर, डरावने, देखने में दुःखदायी रूपों में प्रकट होते हैं। वे तपस्वियों को पापमय और अपवित्र वस्तुओं का स्पर्श कराते हैं तथा अपने सम्मुख खड़े मुनियों को भी कष्ट पहुँचाते हैं।॥14-15॥
'Those non-Aryan demons appear in various forms that are hideous, cruel and dreadful, and are painful to look at. They make the ascetics touch sinful and impure objects and torment the sages standing before them as well.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥